1 Oct 2015

एक जुमला था

जिस तरह से डिजिटल इंडिया (DigitalIndia) का डंका बजाया  जा रहा है
सोचता हूँ  शर्म  करू या गर्व
                                        चलो पहले थोडा गर्व करते है
आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से हिन्दुस्तान को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहे है उससे लग रहा है 

के  हमारा देश सचमुच  Digital हो रहा है जिस तरह से दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनिया भारत की तरफ उम्मीद भरी नजरो 
से देख रही है तो लगता है की हमारा अच्छा दौर शुरू हो चूका है
और जिस तरह से विकास की लहरें उठ रही है तो लगता है हमारा आने वाला कल बहुत ही सुनहरी होगा
और इसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है ....  .जिसका हमें गर्व है 

                                                        अब बात शर्म की जाये 
शर्म आती है की देश का प्रतिनिधि किसी दूसरे देश में जाकर अपने देश की गरीबी का और भ्रष्टाचार का 
दुनिया के सामने बखान करे वो भी किसी देश के प्रतिनिधि की तरह नहीं बल्कि एक पार्टी खास के प्रतिनिधि की तरह 
क्या इस देश ने पिछले 60 सालों में कुछ नहीं पाया क्या इस देश में इतनी गरीबी और भ्रष्टाचार था 
की जिसको मिटाने के लिए अब हम दूसरे देश में जाकर "मेक इन इंडिया" के लिए हाथ फेलायें 
यानी मोदीजी पहले आप भारत को ठीक कीजिए।
 इसी तरह डिजिटल इंडियावगैरह के लुभावने नारों से उनका क्या लेना-देना जो इस तरह के नारों 
का मतलब भी नहीं जानते हो ...जो गरीब जनता 15 लाख के वादे को वादा मान बेठी थी
(खैर वो तो एक जुमला था) 
शर्म आती है की 125 करोड़ आबादी का राष्ट्र भारत इतना अपाहिज़ हो चूका हैं। 
जिस तरह से तो जो यह इतना तामझाम किया जा रहा  है इससे हासिल क्या होगा 
सच है की कुछ वक़्त पहले (चुनाव से पहले)तक जो देश के लोगों में एक जोश सा छाया था जो इंदिरा 
और नेहरु के ज़माने भी नहीं था जो बड़े बड़े वादे किये गए थे जो की अबतक जारी है. 
................................................................................................MJ

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