3 Oct 2015

दादरी की गाय

गाय के जरिये  नफरत फेलाने  वालों  जरा  इन लाइनों पर भी  नजर डालिए ?
...........................................................................
पल पल मैं  बदलती  नफरत की हवाओं को देखो 
जिनके लिए फैली है दहशत जरा उन मांओं को देखो 
.
दर दर की ठोकर खाती इन सपूतों से आस लगाती
नुक्कड़ नुक्कड़ पूँछ हिलाती इन अबलाओं को देखो 
.
जब तक देती है भर भर के दूध पनीर प्यारे  
फिर कूड़ा करकट खाती इन विधवाओं को देखो 
.
इनके फेर मैं ना जाने कितने मरेंगे "अखलाक" 
फिर सियासी रंग चढाते इनके रहनुमाओं को देखो .
.
.....................................................................MJ 


3 comments:

  1. सुप्रभात, बन्धु आप बहुत अच्छा लिख रहे हो, आपकी साहित्य की एक विधा के साथ साथ समाज की आत्मा को भी ज़िन्दा करने के कोशिश काबिले तारीफ़ है, मैं इश्वर से आपके इस लम्बे सफ़र में अछे स्वस्थ्य और कामयाबी की कामना करता हूँ !

    ReplyDelete
  2. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete