29 Oct 2015

एक पत्र.. नरेन्द्र मोदी के नाम

जनाब .कुछ दिन पहले तक जब भी घर से निकलते थे तो लगता था की हम भारत में जी रहे है

और इस पर गर्व होता था खाने पिने घूमने फिरने की खुली आज़ादी थी लगता था हमारी सरकार हमारे साथ है और लगता था था की हम ऐसे भारत का निर्माण कर रहे है जिससे आने वाली नस्लें और दुनिया याद रखेगी इसीलिए हमने एक मजबूत सरकार चुनी  क्योंकि हम मिलीजुली सरकारों से तंग आ चुके थे  

लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे है ..कुछ डर सा महसूस हो रहा है .
अब तो  गाय के पास गुजरें तो डर लगता है की कहीं यह किसी समुदाय विशेष को बुरा लग गया तो खेर नहीं
.
चुनाव से पहले  भोला सा मुंह बनाकर आये थे तुम कहा था अच्छे दिन आने वाले हैं
कैसे अच्छे दिन कहाँ के अच्छे दिन…. यहां तो ससुरा जो कुछ अच्छा था वो भी कचरा हो गया
जो सब्ज़ी 10 रुपये किलो मिलती थी आज वही 30 के भाव मिल रही है मोदीजी…. कब आएंगे अच्छे दिन।.  अगर इस तरह से आएंगे अच्छे दिन तो फिर किसी भारतीय को तो नहीं चाहिए
बड़े सयाने बनके आपने कहा था खाली खज़ाना छोड़ कर गयी थी कांग्रेस...
उस खाली ख़ज़ाने में से भूटान नेपाल को हज़ारों करोड़ दे दिए  …. ऐसा जादू देश की महंगाई कम करने में दिखाओ न जनाब ।..
आपके ब्रांड थे एक बाबा आंख मार मारकर पूरे देश को उल्लू बना गए
कहते थे मोदी को जीताओ  पेट्रोल की कीमत आधी करने को कहा था..... कहां गया महंगाई कम होने की बात करने वाला बाबा  आपका बाइक घर पे ताला लगाकर खड़ी करदी है मोदीजी ।
आपने कहा था आप तरक़्क़ी लाएंगे …. लेकिन ये क्याविकास की  जगह ये फूटे भाग वाला नसीब दे दिया  अब हम गरीब लोग अपना फूटा नसीब लेकर कहां जाएं मोदीजी..........
चारों और आपकी सरकार पर हमले किये जा रहे है अवार्ड लोटाये जा रहे है
हमने जिस मोदी को देखा था वो अपने भाषणों में ताल ठोकता था ...
अब तो खामोश है ................................................................कुछ तो बोलिए जनाब 

2 comments:

  1. बहुत खूब। सांस्‍कृतिक भाषा में कहें तो ''धो डाला'' अधिक उपयुक्‍त जुमला रहेगा। मेरे ब्‍लाग पर आपका स्‍वागत है।

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  2. बहुत खूब । मेरी ब्लॉग पर आप का स्वागत है ।

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