6 Oct 2015

कुर्सी के कीड़े

कुर्सी के कीड़ों ने फिर से ऐसा भड़काया हमको

जिंदा है यह तो मगर हम अपनी जान गंवा बैठे

खामोशियाँ साध ली देखो इन रहनुमाओं ने आज

दहशतों मैं अफ़सोस इन्सानों को इन्सान भुला बैठे

क्या खोया क्या पाया हमने इनकी रहबरी मैं यारो

मस्जिदें तो  आबाद हुई  अफ़सोस ईमान भुला बैठे

मंदिरों को बचाकर भी अफ़सोस भगवान भुला बैठे

.........................................................MJ

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