14 अक्टू॰ 2015

Knock or Joke

 ......................तीन दोस्त एक महफ़िल
अमेरिकन : हमने 2010 में ऐसा अविष्कार किया है जिससे आसपास होने वाली किसी भी दुर्घटना का पता आसानी से लगाया जा सके उसे रोका जा सके 

चाइनीज  : हमने 2011 में  ऐसा अविष्कार किया है की जिससे सड़क हादसों में कमी आयेगी और जिससे लोगों को सहायता जल्दी मिल सकेगी
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हिन्दुस्तानी  : हा हा ठण्ड रख भाई हमारी भी सुन हमने 2015 में ऐसा अविष्कार किया है (digital India ) जिससे फ्रिज में रखी चीजों तक का पता लगा सकते है की दूसरे के फ्रिज में क्या रखा है ताकि किसी को अपनी मर्जी से कुछ भी खाने से रोका जा सके ..

note इस अविष्कार से किसी की  जान भी जा सकती है ..
......ईश्वर आपकी रक्षा करे सरकार भी आपके साथ है 
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10 अक्टू॰ 2015

शर्म से सर झुक गया

कल मेने एक विदेशी दोस्त को दादरी घटना की थोड़ी डिटेल बताई  
दोस्त थोडा चोंका, फिर उसने जो जवाब दिया कसम से शर्म से सर झुक गया ..
उसका जवाब था.....तो भाई इसका मतलब यह हुआ की इंडिया में एक जानवर को माता कहा जाता है 
यानि हर नस्ल की माता , नागोरी, थरपारकर, भगनाड़ी, दज्जल, गावलाव ,गीर, नीमाड़ी, इत्यादि इत्यादि,
कोई बड़े सिंग वाली माता...कोई बड़ी पूँछ वाली माता...कोई काली कोई सफ़ेद माता
कोई चितकबरी माता...कोई बड़े थन वाली माता...कूड़ा करकट खाती माता..
फलां फलां यानि हर नस्ल की माता .....
मेने कहा भाई ऐसी बात नहीं है यह तो कुछ तुच्छ किस्म के लोग हिन्दुस्तानीयों के दिल में नफरत भरकर अपनी रोटियां सेक रहे है ..
.उसने कहा यार यह कैसी माता है जिसकी आड़ में लोगों के क़त्ल तक कर दिए जाते है ............
.,कसम से जवाब देते ना बना ..में आहिस्ता से खिसक लिया
जाते जाते पीछे से उसने चिल्लाकर कहा ..अरे भाई सुना है ब्राज़ील में तो एक गीर नस्ल की माता ने तो दूध देने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए..
...
में सोचता रह गया आखिर बन्दे ने गलत भी तो नहीं कहा था एक कड़वी सच्चाई से रूबरू करा गया .

8 अक्टू॰ 2015

तमाशा चैनल चैनल देखे जा

 देश बर्बाद करके दम लेंगे यह तो बस ठानी है
जो करना है करके रहेंगे सरकारें फिर आनी जानी है
ईश्वर करे रक्षा हमारी,फिर पुलिस भी तो सेवा में है
"बस"काले धन की बात ना करना काला धन रूहानी है
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और हाँ असली चीज तमाशा है बस चैनल चैनल देखे जा  mj

6 अक्टू॰ 2015

कुर्सी के कीड़े

कुर्सी के कीड़ों ने फिर से ऐसा भड़काया हमको
जिंदा है यह तो मगर हम अपनी जान गंवा बैठे
खामोशियाँ साध ली देखो इन रहनुमाओं ने आज
दहशतों मैं अफ़सोस इन्सानों को इन्सान भुला बैठे
क्या खोया क्या पाया हमने इनकी रहबरी मैं यारो
मस्जिदें तो  आबाद हुई  अफ़सोस ईमान भुला बैठे
मंदिरों को बचाकर भी अफ़सोस भगवान भुला बैठे

4 अक्टू॰ 2015

देश झुकने नहीं दूंगा

फैले कितने भी दंगे या फिर हो चाहे फसाद यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा .

चाहे मरे कोई इंसान जानवर की मौत यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा

कितनी गंदगी है यहाँ घूम घूम दुनियां को बताया
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा

आज छाया है दर्द–ऐ-दादरी सारे जहाँ मैं देखो
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा

नफरतें भर गयी शांतिप्रिय जो थे कभी यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा