18 अप्रैल 2018

चिड़ियों के पर ना काटो

वो कश्मीर की वादियां
वो लहूलुहान परिंदे
वो खंडहर से घरौंदे  
सब एक सुर में बोल पड़े

कुछ पंछी पराए है
कुछ अपने हमसाये हैं
ख़ामोश लब खोल पड़े
सब एक सुर में बोल पड़े

चिड़ियों के पर ना काटो
मजहब में इनको ना बांटो
उड़ने दो इनको आसमान में
फेलाने दो अमन हिंदुस्तान में

सब एक सुर में बोल पड़े

17 अप्रैल 2018

तमाशा है चैनल चैनल देखे जा

आप न्यूज़ देखते है
देखिएगा जरूर देखिएगा और चैनल बदल बदल कर देखिएगा
आपको अहसास होगा की जो दिखाया जा रहा है वो सही है और आप उस पर यकीन करने की कोशिश करेंगे उसके नीचे जो कमेंट आ रहे है वो आपको यकीन करने पर मजबूर कर देंगे
लेकिन...
जैसे ही चैनल बदल कर दूसरे चैनल पर आएंगे तो
आपको कुछ अलग ही महसूस होगा यहाँ पर खास गिरोह के द्वारा आपको अहसास दिलाया जायेगा की जो कुछ पहले देखा था वो गलत था सच्चाई तो यहाँ है

और फिर आप उसको सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे
आपकी नजर कुछ सोशल मीडिया की पोस्टों पर पड़ेगी तो आपका दिमाग सुन्न रह जायेगा
की जो आपने  टीवी चैनलों पर देखा सच्चाई उनसे भी अलग है,

क्या सच है क्या गलत.. क्या देखना चाहिए और किस पर यकीन
इसी कश्मकश में आप गाड़ी लेकर बाजार की तरफ निकल पड़ेंगे
गाड़ी में पेट्रोल भी कम है,
खरीदारी करते वक़्त आपको असली मुद्दे याद आएंगे की कैसे एक पूरी लॉबी आपके पीछे लगी है जो आपको सिर्फ घर्म और असली नकली ख़बरों के बीच उलझाए रखना चाहती है

14 अप्रैल 2018

हिन्दुस्तानी रूह

स्वर्ग में उस वक़्त कोहराम मच गया जब
एक 8साल की खून से लथपथ "आसिफा" नाम की रूह दाखिल हुई .....हाहाकार मच गया ..
हिन्दुस्तानी रूह थी इसलिए वहां पर पहले से मौजूद
"निर्भया" नामी रूह ने पहचान लिया और बोली

निर्भया : छुटकी क्या हुआ किसने किया यह हाल
आसिफा : आपा एक हफ्ते से भूखी प्यासी हूं कुछ खिला पिला दो. ...
निर्भया समझ चुकी थी कि यह भी किसी दरिंदों का शिकार बन चुकी है शायद...दिलासा दिया और बोली
छुटकी अब फिक्र ना कर अब तूं दुनिया जैसे नरक से निकल कर यहां आ चुकी है अब तुझे यहां कोई तकलीफ़ नही होगी
यहां में हूं और भी बहुत सी सहेलियां है जो दुनिया जैसे नर्क से आई है
वो देख वहां पर पाकिस्तान से आई "जैनब" भी है तुम्हारी ही उम्र की है तूं उसके साथ खेलना ठीक है...अब बता क्या हुआ था तेरे साथ
आसिफा : आपा में जम्मू कश्मीर के कठवा जिले से आई हूं
मैं 10जनवरी को हिमालय की वादियों में भेड़ बकरियां चरा रही थी दोपहर का खाना घर जाकर खाई फिर अम्मा से कहा मैं जंगल से घोड़े लेकर आती हूं .. फिर घोड़े तो लौट गए लेकिन में ना जा सकी ...वापस क्यों ना सकी...? आपा यह बड़ी दर्दनाक कहानी है..
मुझे एक शैतान बहला कर जंगल ले गया और जानवर बांधने वाले शेड में बांध दिया ..उस ज़ालिम शैतान ने बहुत मारा
फिर में बेहोश हो गई .. जब होश में आई तो शैतान ने मेरे साथ
बहुत बूरा काम किया आपा ..😢 फिर मुझे उस शीड से उठाकर
किसी और जगह ले गया.. वहां किसी कमरे में बंद कर दिया
में भूख प्यास से तड़प रही थी.
बाहर शैतान की आवाज आ रही थी किसी से फोन पर कहा रहा था .. मुझे एक लड़की मिली है हवस मिटानी है तो आजा
शैतान की आवाज पर दूसरे शैतान ने लब्बैक कहा और
फिर 12जनवरी को वो लोग आए और मुझे जानवरों की तरह लूटा मारा और ..... ,😢☹️ कई दिनों तक .....
एक पुलिस वाले अंकल भी थे उन लोगों में जब में आखरी सांसे ले रही थी ना तब पुलिस वाले आंकल  ने कहा इसे मारने से पहले मुझे भी अपनी हवस मिटा लेने दो
फिर उन शैतानों ने दो पत्थरों के बीच मुझे कुचल डाला इस तरह में उस नर्क से निकल कर यहां आ गई .....
निर्भया : फिक्र ना कर छुटकी उस नर्क में भी कुछ फरिश्ते है जो हमारी इस कुर्बानी को जाया नहीं जाने देंगे देखना एक दिन सब एक हो कर उनको सजा दिलवाएंगे
अब आजा मेरी गोद में सो जा में तुझे लौरी सुनाती हूं..
ला ला...लोरी... चांद की चकोरी.. ला ला लोरी😢 चांद की
च्च्चक्क्ककोरी......

13 अप्रैल 2018

सोचना क्या हुआ होगा 🙁

सोचना उस दिन क्या हुआ होगा 🙁

बच्ची थी ना वो तो
खिलौनों से ही खेलती होगी
गुड़िया लेकर सोती होगी
परियों के सपने देखती होगी

सोचना उस दिन क्या हुआ होगा 🙁

जब वो मासूम
घर से बाहर निकली होगी
मां ने कुछ खिलाया होगा
बाप बाजार से उसके लिए
कुछ लेकर आया होगा

सोचना उस दिन क्या हुआ होगा 🙁

फिर शैतान निकले होंगे
जमीन कांप उठी होगी
फरिश्ते तड़प उठे होंगे
जंगल भी दहल उठा होगा

सोचना उस दिन क्या हुआ होगा 🙁

भूख से बेहाल होगी
पानी को तरस रही होगी
मासूम काया देखकर क्या
भेड़ियों को रहम ना आया होगा

सोचना उस दिन क्या हुआ होगा 🙁

वो मासूम चिल्लाई होगी
परिंदे दुबक गए होंगे
हवाएं थम गई होगी
आसमान रोया होगा

सोचना उस दिन क्या हुआ होगा 🙁

12 अप्रैल 2018

नींद कैसे आई होगी

लूट कर मासूम की आबरू
जालिमों तुम्हे नींद कैसे आई होगी

तुमने तड़पा कर उस खिलते फूल को
अपनी बेटियों से कैसे नज़र मिलाई होगी

कसूर क्या था शायद कोई खता नहीं थी
कलेजा नहीं फटा जब वो चिल्लाई होगी

तुम इतने बेरहम कैसे बन गए ऐ दरिंदो
सोचता हूँ शायद तालीम ऐसी पाई होगी

11 अप्रैल 2018

अपने अपने नेता

वहां चलें कहां चले
किसके साथ किसके पीछे
एक काम करें
अपने अपने नेता छांट लें

तुम मुझको कोसना
में तुमको हड़काता हूं
हरे भी है भगवा भी है
अपने अपने नेता छांट लें

इसने यह किया
फिर उसने क्या किया
कुछ ना किया वो भी है यहां
अपने अपने नेता छांट लें
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1 अप्रैल 2018

अजनबी सीढ़ियां


हर रोज मंजिल की तरफ
ना जाने कितना बोझ लेकर
शाम तक नीचे उतरने के लिए
ऊपर चढ़ती है यह सीढ़ियां !

मंजिल तक पहुंचने के लिए
सब अपनी धुन में चले जा रहे
कभी मिले तो मुस्कुरा दिए
अजनबी दोस्त बनाती यह सीढ़ियां!

कभी अकेले कभी साथियों संग
इन सीढ़ियों से हजार बार गुजरे
फिर भी ना जाने क्यों
अजनबी सी लगती है  सीढ़ियां !

पीछे से आती जूतों की आवाज
मानो कह रही हो आगे बढ़ो
दबे पांव तो कभी दौड़ कर
मंजिल की ओर ले जाती सीढ़ियां!