6 जन॰ 2019

यह कमरा

एक तरफ खाली दीवार है
घूरती है तन्हा खामोश है
बाहर की आवाजें
इससे टकराकर दम तोड़ती है
एक बड़ी अलमारी
कुछ पुराने कपड़े है
जिसमे खुशी के मौके पर
पहनने के लिए एक जोड़ा नया है
तलाश है बस खुशी की ....
फ्रिज निरंतर चल रहा है
दुनिया की गर्म फिजाओं में
अपने ठंडे वजूद को बचाकर
खामोशी से चल रहा है
बस चला जा रहा है .......
बिस्तर लगा है सलीके से
सोने के इंतजार में
वो खुद थक कर सो चुका है
मुझे बस लेटना है
नींद की आगोश के लिए ...

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यह कमरा ...(जमील नामा 55/18)

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