सच है की जिनकी सोच इस्लाम के बारे मैं गंदी है
वो हमेशा अपनी गंदी सोच का ही प्रमाण देगा ।।
इनका मुद्दा हमेशा से इस्लाम को नीचा दिखाना और
ईस्लाम का नेगेटिव प्रमोशन करना ही है ।
दुनिया जानती है की मुसलमानों के दिलो में
पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की क्या इज़्ज़त क्या रुतबा है
जिनको खुदा ने सारी इंसानियत के लिए शांति और
अमन का दूत बनाकर कर भेजा था उनकी शान में
बार बार गुस्ताखी करना किस बहादुरी का नाम..
पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के खिलाफ़ की गई टिप्पणी देश का
वातावरण बिगाड़ने का प्रयास है .जो गन्दी मानसिकता दर्शाती है
अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात करने वालो ।।
आज़ादी का ये मतलब नही के किसी भी धर्म की आस्था
को ठेंस पहुंचाई जाए आज़ादी तो यह है के सच को सच
लिखा जाए बोला जाए।
अगर दम है तो इजराइल के ज़ुल्मो की दास्ताँ बारे में बोलो ।।
अगर दम है तो मज़लूमो की चीख पुकार के बारे में आवाज उठाओ।।
अगर शर्म है तो सीरिया के हालात के बारे में बोलो ।।
अगर इंसानियत है तो अमरीका के बर्बरता इराक़ पर बोलो ।।
अगर दिल है तो फलस्तीन की माओं का दर्द सुनाओ ।।
अगर दर्द है तो गुजरात आसाम के किस्से ब्यान करो ।।
यह है अभिव्यक्ति की आज़ादी..
किसी धर्म के बारे मैं गलत भाषा इस्तेमाल करना नहीं
।
लेकिन यह जो दोहरी मानसिकता के लोग है वो एक तरफ़ा ही बोलते लिखते थे
और बोलते लिखते रहेंगे लेकिन सच कभी नही बोलेंगे ।।
13 दिस॰ 2015
8 दिस॰ 2015
फलस्तीन की मिटटी
शायद तेरी कोख में बुझदिल पैदा नहीं होते ...
इसलिए ऐ फलस्तीन की मिटटी तुझे सलाम ..
जब भी फलस्तीन का जिक्र आता है जहन में एक बहादूर और सहन करने वाले लोगों की
छवि उभर आती है फलस्तीन की जनता पर क्रूर इस्राइली जुल्म की इंतिहा सालों से जारी है......
लेकिन ..........
फलस्तीन की उस जमीन को सलाम
जिसके के हर बगीचे को दुश्मनों ने रोंद दिया जहाँ की हर खिड़की का शीशा तक जुल्म का शिकार होकर टुटा है..स्कूल अजायब घर नजर आते है...उस देश की हर वादी में अमन का कत्ल हुआ है.
उस जमीन के हर घर में एक शहीद की तस्वीर दीवार पर जरूर मिलेगी है.......
उस जमीन की हर औरत को सलाम..........
जो खून से लथपथ अपने बच्चो को गोद में लेकर कहती है ऐ जालिम इससे ज्यादा तेरे जुल्म की इन्तिहा क्या होगी लेकिन फ़िक्र ना कर में ऐसे बहादुर बच्चो को फिर जन्म दूंगी
उस जमीन के हर बच्चे को सलाम....
यतीम होना इस देश के बच्चे शायद जानते तक न हो फिर भी दुश्मन के सामने खड़े होकर कहते है .
ढा ले जुल्म तू आखरी हद तक ऐ दुश्मन लेकिन .हम तेरे सामने नहीं झुकेंगे ..हम भी जवानी में कदम रखेंगे हम फिर लड़ेंगे ....क्योंकि हमें बहादुरी सिखाई जाती है. बुजदिली नहीं
ऐ फलस्तीनियों आखिर तुम किस मिट्टी के बने हो ..कितना जुल्म सहन करोगे .....
इसलिए ऐ फलस्तीन की मिटटी तुझे सलाम ..
जब भी फलस्तीन का जिक्र आता है जहन में एक बहादूर और सहन करने वाले लोगों की
छवि उभर आती है फलस्तीन की जनता पर क्रूर इस्राइली जुल्म की इंतिहा सालों से जारी है......
लेकिन ..........
फलस्तीन की उस जमीन को सलाम
जिसके के हर बगीचे को दुश्मनों ने रोंद दिया जहाँ की हर खिड़की का शीशा तक जुल्म का शिकार होकर टुटा है..स्कूल अजायब घर नजर आते है...उस देश की हर वादी में अमन का कत्ल हुआ है.
उस जमीन के हर घर में एक शहीद की तस्वीर दीवार पर जरूर मिलेगी है.......
उस जमीन की हर औरत को सलाम..........
जो खून से लथपथ अपने बच्चो को गोद में लेकर कहती है ऐ जालिम इससे ज्यादा तेरे जुल्म की इन्तिहा क्या होगी लेकिन फ़िक्र ना कर में ऐसे बहादुर बच्चो को फिर जन्म दूंगी
उस जमीन के हर बच्चे को सलाम....
यतीम होना इस देश के बच्चे शायद जानते तक न हो फिर भी दुश्मन के सामने खड़े होकर कहते है .
ढा ले जुल्म तू आखरी हद तक ऐ दुश्मन लेकिन .हम तेरे सामने नहीं झुकेंगे ..हम भी जवानी में कदम रखेंगे हम फिर लड़ेंगे ....क्योंकि हमें बहादुरी सिखाई जाती है. बुजदिली नहीं
ऐ फलस्तीनियों आखिर तुम किस मिट्टी के बने हो ..कितना जुल्म सहन करोगे .....
24 नव॰ 2015
भारत आगे बढ़ रहा है
जहाँ हर कोई बिन बात के आपस में लड़ रहा है
नफरत है शहर शहर किसान भी सूली चढ़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा है
जहाँ एक तरफ भूख से बेहाल तरसते गरीब देखो
एक तरफ अनाज सरकारी गोदामों में सड़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा है
भूल गए इंसानियत धर्म मजहब पर हाहाकार देखो
कोई सुरक्षित नहीं भार महंगाई का जो पड़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा
नफरत है शहर शहर किसान भी सूली चढ़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा है
जहाँ एक तरफ भूख से बेहाल तरसते गरीब देखो
एक तरफ अनाज सरकारी गोदामों में सड़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा है
भूल गए इंसानियत धर्म मजहब पर हाहाकार देखो
कोई सुरक्षित नहीं भार महंगाई का जो पड़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा
15 नव॰ 2015
राष्ट्रपति के नाम एक पत्र
महामहिम राष्ट्रपति जी आज जो अराजकता या असहिष्णुता फैली हुई है उसके बारे में
कुछ तो बोलिए जनाब ?
आज हमारा भारत सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण मानदंडों पर पिछड़ता जा रहा है,
ऐसी स्थिति हमारे लोकतन्त्र के लिए खतरनाक है....यह आप भी बखूबी जानते है
जनाब ,लोकतन्त्र में जनता के भरोसे का खुलेआम मज़ाक बनाया जा रहा है ..
हमारे देश की गरीबी और पिछड़ेपन को विश्वभर में एक बाकायदा मंच लगाकर सुनाया जा रहा है
में पूछना चाहुगा जनाब क्या इस देश ने पिछले 60 सालों में यही पाया है
गरीबी और विकास के बारे मैं कोई बात नहीं हो रही ..बात होती है सिर्फ धर्म और जाती की
कुछ भद्रजन इसको बखूबी अंजाम दे रहे है ..
महामहिम आप ही ने कहा था अराजकता शासन का विकल्प नहीं हो सकती
लेकिन आज धर्म के नाम साध्वी प्राची, आदित्यनाथ जेसे कुछ जो हर धर्म में मोजूद है
जो धर्म के नाम पर नफरत का जहर उगल रहे है यह अराजकता नहीं तो और क्या है
कुछ कीजिये महाराज .....इनसे रोकिये यह के लिए बड़ा खतरा है ....
आज कही किसी को कुछ खाने पर मार दिया जाता है
कही किसी को देश से निकालने की बात की जा रही है
किसान की हालत जस से तस है गरीब और लाचार होता जा रहा है
कुछ कीजिये जनाब इससे पहले की कोई आप पर भी ऊँगली उठाये ..
अपने संवैधानिक सीमा में रहकर ही सही पर इतना तो कर दीजिये जनाब .............
गणतन्त्र का नागरिक
कुछ तो बोलिए जनाब ?
आज हमारा भारत सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण मानदंडों पर पिछड़ता जा रहा है,
ऐसी स्थिति हमारे लोकतन्त्र के लिए खतरनाक है....यह आप भी बखूबी जानते है
जनाब ,लोकतन्त्र में जनता के भरोसे का खुलेआम मज़ाक बनाया जा रहा है ..
हमारे देश की गरीबी और पिछड़ेपन को विश्वभर में एक बाकायदा मंच लगाकर सुनाया जा रहा है
में पूछना चाहुगा जनाब क्या इस देश ने पिछले 60 सालों में यही पाया है
गरीबी और विकास के बारे मैं कोई बात नहीं हो रही ..बात होती है सिर्फ धर्म और जाती की
कुछ भद्रजन इसको बखूबी अंजाम दे रहे है ..
महामहिम आप ही ने कहा था अराजकता शासन का विकल्प नहीं हो सकती
लेकिन आज धर्म के नाम साध्वी प्राची, आदित्यनाथ जेसे कुछ जो हर धर्म में मोजूद है
जो धर्म के नाम पर नफरत का जहर उगल रहे है यह अराजकता नहीं तो और क्या है
कुछ कीजिये महाराज .....इनसे रोकिये यह के लिए बड़ा खतरा है ....
आज कही किसी को कुछ खाने पर मार दिया जाता है
कही किसी को देश से निकालने की बात की जा रही है
किसान की हालत जस से तस है गरीब और लाचार होता जा रहा है
कुछ कीजिये जनाब इससे पहले की कोई आप पर भी ऊँगली उठाये ..
अपने संवैधानिक सीमा में रहकर ही सही पर इतना तो कर दीजिये जनाब .............
गणतन्त्र का नागरिक
2 नव॰ 2015
वक़्त
ना जाने कब कैसे वक़्त बे साख्ता उड़ा
जैसे पंख फैलाये आसमां में फाख्ता उड़ा
मिट गयी ना जाने कैसी कैसी हस्तियां
जब जब जिससे भी इसका वास्ता पड़ा
बदलने चले थे कई सिकंदर और कलंदर
ख़ाक हुए जिसकी राह मैं यह रास्ता पड़ा
मत कर गुरूर अपनी हस्ती पर ऐ "जमील ''
कुछ पल उसे देदे सामने जो फ़कीर खड़ा
जैसे पंख फैलाये आसमां में फाख्ता उड़ा
मिट गयी ना जाने कैसी कैसी हस्तियां
जब जब जिससे भी इसका वास्ता पड़ा
बदलने चले थे कई सिकंदर और कलंदर
ख़ाक हुए जिसकी राह मैं यह रास्ता पड़ा
मत कर गुरूर अपनी हस्ती पर ऐ "जमील ''
कुछ पल उसे देदे सामने जो फ़कीर खड़ा
28 अक्टू॰ 2015
चल पनघट
तूं चल पनघट में तेरे पीछे पीछे आता हूँ
देखूं भीगा तन तेरा ख्वाब यह सजाता हूँ
मटक मटक चले लेकर तू जलभरी गगरी
नाचे मेरे मन मौर हरपल आस लगाता हूँ
जब जब भीगे चोली तेरी भीगे चुनरिया
बरसों पतझड़ रहा मन हरजाई ललचाता हूँ
लचक लचक कमरिया तेरी नागिनरूपी बाल
आह: हसरत ना रह जाये दिल थाम जाता हूँ
25 अक्टू॰ 2015
जुमला भा गया
आहट है कैसी ? वक़्त ये कैसा है आ गया
बनाकर बहाना गाय का कोई इंसान खा गया
टूट पड़े सन्नाटे कल तक खामोशियाँ छाई थी
दंगे ही दंगे है वक़्त -ऐ- हुड्दंग जो आ गया
मिलकर भुगतो चुनली हुकूमतें हमने ऐसी ऐसी
अफसोफ़ लोट के दौर -ऐ- रावण जो आ गया
सहते आये थे फिर कुछ बदलने की आस थी
अब ना कर शिकवा तब हमें जुमला जो भा गया
बनाकर बहाना गाय का कोई इंसान खा गया
टूट पड़े सन्नाटे कल तक खामोशियाँ छाई थी
दंगे ही दंगे है वक़्त -ऐ- हुड्दंग जो आ गया
मिलकर भुगतो चुनली हुकूमतें हमने ऐसी ऐसी
अफसोफ़ लोट के दौर -ऐ- रावण जो आ गया
सहते आये थे फिर कुछ बदलने की आस थी
अब ना कर शिकवा तब हमें जुमला जो भा गया
21 अक्टू॰ 2015
दहशत है फैली
दहशत है फैली हर शहर मोहल्ले मोहल्ले
नफरत भरी गलियां देखो इन हुक्मरानों की
.
भाव चवन्नी के बिकती मजबूर काया यहाँ
बेगेरत मरती आत्मा देखो सियासतदानों की
.
तिल तिल मरते कर्ज में डूबे अन्नदाता यहाँ
सुखा है दूर तलक देखो हालत किसानों की
.
धर्म की बड़ी दीवार खड़ी है चारों और यहाँ
जानवर निशब्द है औकात नहीं इन्सानों की
................................................................MJ
.
नफरत भरी गलियां देखो इन हुक्मरानों की
.
भाव चवन्नी के बिकती मजबूर काया यहाँ
बेगेरत मरती आत्मा देखो सियासतदानों की
.
तिल तिल मरते कर्ज में डूबे अन्नदाता यहाँ
सुखा है दूर तलक देखो हालत किसानों की
.
धर्म की बड़ी दीवार खड़ी है चारों और यहाँ
जानवर निशब्द है औकात नहीं इन्सानों की
................................................................MJ
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14 अक्टू॰ 2015
Knock or Joke
......................तीन दोस्त एक महफ़िल
अमेरिकन : हमने 2010 में ऐसा अविष्कार किया है जिससे आसपास होने
वाली किसी भी दुर्घटना का पता आसानी से लगाया जा सके उसे रोका जा सके
चाइनीज : हमने 2011 में
ऐसा अविष्कार किया है की जिससे सड़क हादसों
में कमी आयेगी और जिससे लोगों को सहायता जल्दी मिल सकेगी
.
हिन्दुस्तानी : हा हा ठण्ड
रख भाई हमारी भी सुन हमने 2015 में ऐसा अविष्कार किया है (digital India ) जिससे फ्रिज में रखी चीजों तक का पता लगा सकते है की दूसरे के फ्रिज
में क्या रखा है ताकि किसी को अपनी मर्जी से कुछ भी खाने से रोका जा सके ..
note इस अविष्कार से किसी की जान भी जा सकती है ..
......ईश्वर आपकी रक्षा करे सरकार भी आपके साथ है
.
10 अक्टू॰ 2015
शर्म से सर झुक गया
कल मेने एक विदेशी दोस्त को दादरी घटना की थोड़ी
डिटेल बताई
दोस्त थोडा चोंका, फिर उसने जो जवाब दिया कसम से शर्म से सर झुक गया ..
उसका जवाब था.....तो भाई इसका मतलब यह हुआ की इंडिया में एक जानवर को माता कहा जाता है
यानि हर नस्ल की माता , नागोरी, थरपारकर, भगनाड़ी, दज्जल, गावलाव ,गीर, नीमाड़ी, इत्यादि इत्यादि,
कोई बड़े सिंग वाली माता...कोई बड़ी पूँछ वाली माता...कोई काली कोई सफ़ेद माता
कोई चितकबरी माता...कोई बड़े थन वाली माता...कूड़ा करकट खाती माता..
फलां फलां यानि हर नस्ल की माता .....
मेने कहा भाई ऐसी बात नहीं है यह तो कुछ तुच्छ किस्म के लोग हिन्दुस्तानीयों के दिल में नफरत भरकर अपनी रोटियां सेक रहे है ..
.उसने कहा यार यह कैसी माता है जिसकी आड़ में लोगों के क़त्ल तक कर दिए जाते है ............
.,कसम से जवाब देते ना बना ..में आहिस्ता से खिसक लिया
जाते जाते पीछे से उसने चिल्लाकर कहा ..अरे भाई सुना है ब्राज़ील में तो एक गीर नस्ल की माता ने तो दूध देने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए..
...
में सोचता रह गया आखिर बन्दे ने गलत भी तो नहीं कहा था एक कड़वी सच्चाई से रूबरू करा गया .
दोस्त थोडा चोंका, फिर उसने जो जवाब दिया कसम से शर्म से सर झुक गया ..
उसका जवाब था.....तो भाई इसका मतलब यह हुआ की इंडिया में एक जानवर को माता कहा जाता है
यानि हर नस्ल की माता , नागोरी, थरपारकर, भगनाड़ी, दज्जल, गावलाव ,गीर, नीमाड़ी, इत्यादि इत्यादि,
कोई बड़े सिंग वाली माता...कोई बड़ी पूँछ वाली माता...कोई काली कोई सफ़ेद माता
कोई चितकबरी माता...कोई बड़े थन वाली माता...कूड़ा करकट खाती माता..
फलां फलां यानि हर नस्ल की माता .....
मेने कहा भाई ऐसी बात नहीं है यह तो कुछ तुच्छ किस्म के लोग हिन्दुस्तानीयों के दिल में नफरत भरकर अपनी रोटियां सेक रहे है ..
.उसने कहा यार यह कैसी माता है जिसकी आड़ में लोगों के क़त्ल तक कर दिए जाते है ............
.,कसम से जवाब देते ना बना ..में आहिस्ता से खिसक लिया
जाते जाते पीछे से उसने चिल्लाकर कहा ..अरे भाई सुना है ब्राज़ील में तो एक गीर नस्ल की माता ने तो दूध देने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए..
...
में सोचता रह गया आखिर बन्दे ने गलत भी तो नहीं कहा था एक कड़वी सच्चाई से रूबरू करा गया .
8 अक्टू॰ 2015
तमाशा चैनल चैनल देखे जा
देश बर्बाद करके दम लेंगे यह तो बस ठानी है
जो करना है करके रहेंगे सरकारें फिर आनी जानी है
ईश्वर करे रक्षा हमारी,फिर पुलिस भी तो सेवा में है
"बस"काले धन की बात ना करना काला धन रूहानी है
.........................................................................
और हाँ असली चीज तमाशा है बस चैनल चैनल देखे जा mj
जो करना है करके रहेंगे सरकारें फिर आनी जानी है
ईश्वर करे रक्षा हमारी,फिर पुलिस भी तो सेवा में है
"बस"काले धन की बात ना करना काला धन रूहानी है
.........................................................................
और हाँ असली चीज तमाशा है बस चैनल चैनल देखे जा mj
6 अक्टू॰ 2015
कुर्सी के कीड़े
कुर्सी के कीड़ों ने फिर से ऐसा भड़काया हमको
जिंदा है यह तो मगर हम अपनी जान गंवा बैठे
खामोशियाँ साध ली देखो इन रहनुमाओं ने आज
दहशतों मैं अफ़सोस इन्सानों को इन्सान भुला बैठे
क्या खोया क्या पाया हमने इनकी रहबरी मैं यारो
मस्जिदें तो आबाद हुई अफ़सोस ईमान भुला बैठे
मंदिरों को बचाकर भी अफ़सोस भगवान भुला बैठे
जिंदा है यह तो मगर हम अपनी जान गंवा बैठे
खामोशियाँ साध ली देखो इन रहनुमाओं ने आज
दहशतों मैं अफ़सोस इन्सानों को इन्सान भुला बैठे
क्या खोया क्या पाया हमने इनकी रहबरी मैं यारो
मस्जिदें तो आबाद हुई अफ़सोस ईमान भुला बैठे
मंदिरों को बचाकर भी अफ़सोस भगवान भुला बैठे
4 अक्टू॰ 2015
देश झुकने नहीं दूंगा
फैले कितने भी दंगे या फिर हो चाहे फसाद यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा .
चाहे मरे कोई इंसान जानवर की मौत यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
कितनी गंदगी है यहाँ घूम घूम दुनियां को बताया
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
आज छाया है दर्द–ऐ-दादरी सारे जहाँ मैं देखो
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
नफरतें भर गयी शांतिप्रिय जो थे कभी यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा .
चाहे मरे कोई इंसान जानवर की मौत यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
कितनी गंदगी है यहाँ घूम घूम दुनियां को बताया
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
आज छाया है दर्द–ऐ-दादरी सारे जहाँ मैं देखो
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
नफरतें भर गयी शांतिप्रिय जो थे कभी यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
3 अक्टू॰ 2015
दादरी की गाय
गाय के जरिये नफरत फेलाने वालों जरा इन लाइनों पर भी नजर डालिए ?
...........................................................................
पल पल मैं बदलती नफरत की हवाओं को देखो
जिनके लिए फैली है दहशत जरा उन मांओं को देखो
.
दर दर की ठोकर खाती इन सपूतों से आस लगाती
नुक्कड़ नुक्कड़ पूँछ हिलाती इन अबलाओं को देखो
.
जब तक देती है भर भर के दूध पनीर प्यारे
फिर कूड़ा करकट खाती इन विधवाओं को देखो
.
इनके फेर मैं ना जाने कितने मरेंगे "अखलाक"
फिर सियासी रंग चढाते इनके रहनुमाओं को देखो .
.
.....................................................................MJ
...........................................................................
पल पल मैं बदलती नफरत की हवाओं को देखो
जिनके लिए फैली है दहशत जरा उन मांओं को देखो
.
दर दर की ठोकर खाती इन सपूतों से आस लगाती
नुक्कड़ नुक्कड़ पूँछ हिलाती इन अबलाओं को देखो
.
जब तक देती है भर भर के दूध पनीर प्यारे
फिर कूड़ा करकट खाती इन विधवाओं को देखो
.
इनके फेर मैं ना जाने कितने मरेंगे "अखलाक"
फिर सियासी रंग चढाते इनके रहनुमाओं को देखो .
.
.....................................................................MJ
2 अक्टू॰ 2015
नस्लों मैं भेड़िये
ना जाने यह कैसे कैसे अभियान चलाते है
फिर इनकी आड़ मैं यह इंसान जलाते है
.
जब देखा फ़ैल रही है भाईचारे मशालें यहाँ
फिर यह नफरतों के चुभते बाण चलाते है
.
लड़ाकर हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस मैं
फिर भी नस्लों मैं भेड़िये यह इंसान कहलाते है
.
गए नहीं कभी मंदिर मस्जिद की चोखट पर
अपना ही धर्म सबसे से ऊँचा हमको सिखलाते है
.
इतने मैं ना हुआ इनका मकसद पूरा तो
फिर यह दुष्ट गीता और कुरान जलाते है
.
फिर ले जाकर इन मुद्दों को संसद तक "राज"
फिर ले जाकर इन मुद्दों को संसद तक "राज"
वहां भी लगता है जैसे हैवान चिल्लाते है
.
.............................................MJ deshwali ( RAAJ )
1 अक्टू॰ 2015
अखलाक़
एक अफवाह उडी के बीफ खाया जा रहा है
हम कितने DIGITAL है यह जताया जा रहा है
कोई धर्म नहीं शायद इनका फिर कौन है यह
बीफ के नाम पर क्यूँ नफरतों को बढाया जा रहा है
कुछ तो फर्क कर देता खूँ मैं भी ऐ खुदा
जिनके सहारे कत्ले-ऐ-आम मचाया जा रहा है
.
कसूर इतना था उस गरीब का वो इक मुस्लिम था
जाने किस किस को यह पाठ पढाया जा रहा है
क्यों और कब तक मरेंगे यूँही कितने (अखलाक )
मातम है कहीं तो कहीं जश्न मनाया जा रहा है
यहाँ जब कोई नहीं सुन रहा उस गरीब की आह
दूर कही अनसुलझा मसला-ऐ-कश्मीर सुलझाया जा रहा है |
.
......................................................................MJ DESHWALI
हम कितने DIGITAL है यह जताया जा रहा है
कोई धर्म नहीं शायद इनका फिर कौन है यह
बीफ के नाम पर क्यूँ नफरतों को बढाया जा रहा है
कुछ तो फर्क कर देता खूँ मैं भी ऐ खुदा
जिनके सहारे कत्ले-ऐ-आम मचाया जा रहा है
.
कसूर इतना था उस गरीब का वो इक मुस्लिम था
जाने किस किस को यह पाठ पढाया जा रहा है
क्यों और कब तक मरेंगे यूँही कितने (अखलाक )
मातम है कहीं तो कहीं जश्न मनाया जा रहा है
यहाँ जब कोई नहीं सुन रहा उस गरीब की आह
दूर कही अनसुलझा मसला-ऐ-कश्मीर सुलझाया जा रहा है |
.
......................................................................MJ DESHWALI
एक मासूम-सी बेटी
प्यारे पापा, जब मैं हॉस्पिटल में एडमिट हुई तब मुझे सांस लेने में परेशानी थी, ब्लड प्रेशर भी कम था और गुर्दे भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे, लेकिन अब मैं कुछ ठीक महसूस कर रही हूं। मशीनों से भी तो आजादी मिल गई मुझे। सबसे अच्छा तब लगा जब आपने मुझे गुरूवार की सुबह कई दिन बाद आपने गोद में लिया। यहां आईसीयू में नर्सेज आपस में बात करती हैं और कहती हैं कि बेटी से भी कोई इतना प्यार कैसे कर सकता है? तब मन ही मन मुस्कराती हूं और सोचती हूं कि वाकई मैं कितनी खुशकिस्मत हूं।
मुझे जन्म देने वाली मां का प्यार तो नसीब नहीं हुआ, लेकिन आपने हर कमी पूरी की।
आपके पास पैसे नहीं थे, इस वजह से मुझे स्लिंग में अपनी गर्दन में लटकाकर रिक्शा चलाया, लेकिन मैं छोटी हूं ना मौसम का यह मिजाज सह नहीं पाई और बीमार हो गई।
मेरी बीमारी में आप कितना परेशान हुए। आपकी परेशानी प्रार्थना बनकर भगवान के दर पहुंची और देखो, उसका प्रभाव आज आपके सामने है। डॉक्टर अंकल ने बताया ना कि मेरा वजन भी बढकर 1735 ग्राम हो गया है।
बस, अब कुछ दिन की ही बात है। ये फंगल इंफेक्शन भी ठीक हो जाएंगे, फिर हम अपने घर चलेंगे। पैसों की परेशानी तो लोगों की मदद से अब दूर हो गई ना पापा। मैं भी बड़ी होकर पढ़ूंगी-लिखूंगी। शुक्रिया उन सभी लोगों को जिन्होंने मेरे पापा की मदद की और मेरे लिए प्रार्थना।
मुझे जन्म देने वाली मां का प्यार तो नसीब नहीं हुआ, लेकिन आपने हर कमी पूरी की।
आपके पास पैसे नहीं थे, इस वजह से मुझे स्लिंग में अपनी गर्दन में लटकाकर रिक्शा चलाया, लेकिन मैं छोटी हूं ना मौसम का यह मिजाज सह नहीं पाई और बीमार हो गई।
मेरी बीमारी में आप कितना परेशान हुए। आपकी परेशानी प्रार्थना बनकर भगवान के दर पहुंची और देखो, उसका प्रभाव आज आपके सामने है। डॉक्टर अंकल ने बताया ना कि मेरा वजन भी बढकर 1735 ग्राम हो गया है।
बस, अब कुछ दिन की ही बात है। ये फंगल इंफेक्शन भी ठीक हो जाएंगे, फिर हम अपने घर चलेंगे। पैसों की परेशानी तो लोगों की मदद से अब दूर हो गई ना पापा। मैं भी बड़ी होकर पढ़ूंगी-लिखूंगी। शुक्रिया उन सभी लोगों को जिन्होंने मेरे पापा की मदद की और मेरे लिए प्रार्थना।
एक जुमला था
जिस तरह से डिजिटल इंडिया (DigitalIndia) का डंका बजाया जा रहा है
सोचता हूँ शर्म करू या गर्व
चलो पहले थोडा गर्व करते है
आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से हिन्दुस्तान को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहे है उससे लग रहा है के हमारा देश सचमुच Digital हो रहा है जिस तरह से दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनिया भारत की तरफ उम्मीद भरी नजरो से देख रही है तो लगता है की हमारा अच्छा दौर शुरू हो चूका है
और जिस तरह से विकास की लहरें उठ रही है तो लगता है हमारा आने वाला कल बहुत ही सुनहरी होगा और इसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है .... .जिसका हमें गर्व है
अब बात शर्म की जाये
शर्म आती है की देश का प्रतिनिधि किसी दूसरे देश में जाकर अपने देश की गरीबी का और भ्रष्टाचार का दुनिया के सामने बखान करे वो भी किसी देश के प्रतिनिधि की तरह नहीं बल्कि एक पार्टी खास के प्रतिनिधि की तरह
क्या इस देश ने पिछले 60 सालों में कुछ नहीं पाया क्या इस देश में इतनी गरीबी और भ्रष्टाचार था
की जिसको मिटाने के लिए अब हम दूसरे देश में जाकर "मेक इन इंडिया" के लिए हाथ फेलायें
‘यानी मोदीजी पहले आप भारत को ठीक कीजिए।
इसी तरह ‘डिजिटल इंडिया’ वगैरह के लुभावने नारों से उनका क्या लेना-देना जो इस तरह के नारों का मतलब भी नहीं जानते हो ...जो गरीब जनता 15 लाख के वादे को वादा मान बेठी थी
(खैर वो तो एक जुमला था)
शर्म आती है की 125 करोड़ आबादी का राष्ट्र भारत इतना अपाहिज़ हो चूका हैं।
जिस तरह से तो जो यह इतना तामझाम किया जा रहा है इससे हासिल क्या होगा
सच है की कुछ वक़्त पहले (चुनाव से पहले)तक जो देश के लोगों में एक जोश सा छाया था जो इंदिरा और नेहरु के ज़माने भी नहीं था जो बड़े बड़े वादे किये गए थे जो की अबतक जारी है.
सोचता हूँ शर्म करू या गर्व
चलो पहले थोडा गर्व करते है
आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से हिन्दुस्तान को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहे है उससे लग रहा है के हमारा देश सचमुच Digital हो रहा है जिस तरह से दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनिया भारत की तरफ उम्मीद भरी नजरो से देख रही है तो लगता है की हमारा अच्छा दौर शुरू हो चूका है
और जिस तरह से विकास की लहरें उठ रही है तो लगता है हमारा आने वाला कल बहुत ही सुनहरी होगा और इसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है .... .जिसका हमें गर्व है
अब बात शर्म की जाये
शर्म आती है की देश का प्रतिनिधि किसी दूसरे देश में जाकर अपने देश की गरीबी का और भ्रष्टाचार का दुनिया के सामने बखान करे वो भी किसी देश के प्रतिनिधि की तरह नहीं बल्कि एक पार्टी खास के प्रतिनिधि की तरह
क्या इस देश ने पिछले 60 सालों में कुछ नहीं पाया क्या इस देश में इतनी गरीबी और भ्रष्टाचार था
की जिसको मिटाने के लिए अब हम दूसरे देश में जाकर "मेक इन इंडिया" के लिए हाथ फेलायें
‘यानी मोदीजी पहले आप भारत को ठीक कीजिए।
इसी तरह ‘डिजिटल इंडिया’ वगैरह के लुभावने नारों से उनका क्या लेना-देना जो इस तरह के नारों का मतलब भी नहीं जानते हो ...जो गरीब जनता 15 लाख के वादे को वादा मान बेठी थी
(खैर वो तो एक जुमला था)
शर्म आती है की 125 करोड़ आबादी का राष्ट्र भारत इतना अपाहिज़ हो चूका हैं।
जिस तरह से तो जो यह इतना तामझाम किया जा रहा है इससे हासिल क्या होगा
सच है की कुछ वक़्त पहले (चुनाव से पहले)तक जो देश के लोगों में एक जोश सा छाया था जो इंदिरा और नेहरु के ज़माने भी नहीं था जो बड़े बड़े वादे किये गए थे जो की अबतक जारी है.
30 सित॰ 2015
गाय का गोबर
" गाय का गोबर एटम बम को बेअसर कर देता है " -आरएसएस RSS
अगर यही बात है तो फिर भारत को किसी से डरने की ज़रुरत नहीं
क्योंकि हमारे यहाँ तो हर गाँव की हर गली में एटम बम निरोधक
दस्ते रखे हुए है .
फिर तो इंडिया की हर गोशाला को एटम बम निरोधक आर्मी कैंप घोषित कर देना चाहिए ...
फिर तो हमें दुनिया को इस समस्या से निजात दिला देनी चाहिए
क्योंकि अमेरिका हमेशा एटम बम बनाने वाले देशो
के खिलाफ रहा है
फिर तो UN को किसी भी एटम बम बनाने वाले देश पर पाबन्दी नहीं लगानी चाहिए .क्योंकि .इसका इतना आसान सा हल तो RSS ने
निकाल ही लिया है
फिर क्यों इतनी बड़ी बम निरोधक आर्मी होने के बावजूद हम पड़ोसी देशो से सीधे दो दो हाथ नहीं करते ..किस बात का डर है
कही डर यह तो नहीं के पडोसी देशों के पास हम से अच्छी नसल की गायें हो
और हमसे ज्यादा एटम बम निरोधक पदार्थ हो .???
अगर यही बात है तो फिर भारत को किसी से डरने की ज़रुरत नहीं
क्योंकि हमारे यहाँ तो हर गाँव की हर गली में एटम बम निरोधक
दस्ते रखे हुए है .
फिर तो इंडिया की हर गोशाला को एटम बम निरोधक आर्मी कैंप घोषित कर देना चाहिए ...
फिर तो हमें दुनिया को इस समस्या से निजात दिला देनी चाहिए
क्योंकि अमेरिका हमेशा एटम बम बनाने वाले देशो
के खिलाफ रहा है
फिर तो UN को किसी भी एटम बम बनाने वाले देश पर पाबन्दी नहीं लगानी चाहिए .क्योंकि .इसका इतना आसान सा हल तो RSS ने
निकाल ही लिया है
फिर क्यों इतनी बड़ी बम निरोधक आर्मी होने के बावजूद हम पड़ोसी देशो से सीधे दो दो हाथ नहीं करते ..किस बात का डर है
कही डर यह तो नहीं के पडोसी देशों के पास हम से अच्छी नसल की गायें हो
और हमसे ज्यादा एटम बम निरोधक पदार्थ हो .???
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